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23 मार्च 2013

मेरा ब्लॉग सुनो

कमाल का टाइटल है, है ना? मेरा ब्लॉग सुनो, भला ऐसा भी होता है क्या ब्लॉग पढ़ा तो जाता है पर सुना भी जाता है क्या?

आपके इस प्रश्न का मेरा उत्तर है हाँ, क्यूँ नहीं ब्लॉग भी सुना जा सकता है बशर्ते उसे कोई सुनाने बाला हो। तो सवाल यह है कि कोई सुनाएगा क्यूँ? पर उससे पहले सवाल यह है कि कोई सुनाये ही क्यूँ? अच्छा एक बात बताइये आपकी जिन्दगी की पहली कहानी आपने पढी थी या सुनी थी? भई मैंने तो सुनी थी, पढी तो उसके लगभग ४-५ साल बाद थी :)

अब मेरा दूसरा सवाल यह है कि आपको कहानी सुनने में ज्यादा मजा आता है या पढने में? आपका मुझे नहीं पता पर मुझे सुनने में मजा ज्यादा आता है, चाहे वो मैं मेरे गाँव के बुजुर्गों से सुनूँ या मेरे पापा जी से, और सुनने का यह मजा कहानी तक ही सीमित नहीं है, कविता सुनने का मजा तो उसे पढने के मुकाबले बहुत ज्यादा होता है।

जब हम कोई कहानी और कविता किसी से सुनते हैं तो उसमें रस ही अलग होता है, और कविता पढने में तो कई बार अर्थ का अनर्थ ही हो जाता है, किस्से हमेशा से ही सुने जाते रहे हैं, चुटकुले पढने में वह मजा कभी नहीं आता जो उसे सुनने-सुनाने में आता है।

अब आप कहेंगे कि मैं सुनने-सुनाने की इतनी वकालत क्यूँ कर रहा हूँ? वो इसलिए क्यूंकि मुझे इसमें फायदा दिखाई दे रहा है। किस तरह का फायदा? अभी बता देता हूँ-

हिन्दी का फायदा- हिन्दी में आप लिखते हैं, मैं भी हिन्दी में लिखता हूँ। कुछ ब्लोगिंग प्लेटफोर्म की मदद से हमारे हिन्दी के यह ब्लॉग सालों-साल यहाँ रहने बाले हैं, यह भी अच्छी बात है। पर हमारे ब्लॉग ब्लोगरों के अलावा कितने लोग पढ़ते हैं? शायद ५०-१०० लोग और पढ़ लेते होंगे। इसके पीछे और भी कई कारण हो सकते हैं पर एक कारण यह भी है कि पूरा भारत हिन्दी पढ़ नहीं पाता, मैं ऐसा इसलिए कह सकता हूँ क्यूंकि मेरे हिन्दी के वीडियो ट्यूटोरियल भारत के हर राज्य से खरीदे जाते हैं, जिनमे टेक्स्ट इंग्लिश में लिखा होता है और मेरी आवाज हिन्दी में होती है, एक बार मैंने अपने वीडियो में हिन्दी में लिखा भी और आवाज भी हिन्दी में रखी तो मेरे वीडियो पर कमेन्ट कुछ इस तरह से आये

पर ये लोग हिन्दी को सुन कर समझ लेते हैं ( यह शायद हमारी फिल्मों की मेहरबानी है ). तो हम यदि ब्लॉग को सुना सकें तो हम अपनी बात को और ज्यादा लोगों तक पहुंचा सकते हैं। यदि हम ऐसा कर पाए तो हो सकता है वह बीता हुआ किस्से-कहानियों का दौर फिर से लौट आये :)

ब्लोगरों का फायदा: ब्लोगरों के लिए असली फायदा तो यही है कि हमारी बात ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे पर आर्थिक फायदा भी हो सकता है जो इस समय हिन्दी के ब्लॉग से नहीं हो पा रहा है।

कैसे सुना सकते हैं हम अपने ब्लॉग को? अपने ब्लॉग को सुनाने का तरीका बहुत आसान है, आप सभी के पास कम्प्युटर है, कुछ ब्लोगरों के पास तो स्मार्ट-फोन भी है, तो अपनी अपनी डिवाइस में अपने ब्लॉग को पढ़ते हुए ऑडियो रिकोर्ड कर लीजिये, रिकोर्ड करते समय अपने ब्लॉग को वैसे ही पढ़िए जैसे आप किसी को अपना लेख सुना रहे हों। बस हो गया काम आपके पास एक mp३ फ़ाइल आ जायेगी, अब अगली समस्या है की इस ऑडियो फ़ाइल का क्या किया जाए? कैसे इसे अपने ब्लॉग पर अटैच करें जिससे लोग ब्लॉग को पढने के साथ-साथ सुन भी सकें। 

इस ऑडियो फ़ाइल को अटैच करने की समस्या नई नहीं है, यह ब्लोगरों के लिए हमेशा से सरदर्द रहा है। कुछ ब्लोगर divshare का प्रयोग करते हैं पर अभी कुछ माह से divshare में कुछ समस्या आ रही है, इसके आलावा बहुत सी ऐसी वेबसाईट हैं जो ऑडियो फ़ाइल को शेयर करने की सुविधा देतीं हैं पर समस्या यह है की इनमें से अधिकतर मुफ्त नहीं हैं, और जो रुपये लेतीं है वो भी माह के हिसाब से लेतीं हैं और वो भी डॉलर में, जिससे ब्लोगरों की समस्या बढ़ जायेगी।

इस समस्या का समाधान मैंने करने की कोशिश की मेरे VPS में 50GB स्पेस है जिसमें से सिर्फ 20GB ही मैं प्रयोग में ला पाता हूँ कुछ माह पहले मैंने सोचा की क्यूँ ना मैंने अपने सर्वर पर ऑडियो फ़ाइल को रखने की सुविधा ब्लोगरों को दे दूं, तो थोडा प्लान करके मैंने merablogsuno.com नाम से एक डोमेन नेम बुक करवा लिया और वेबसाईट भी तैयार कर ली, अभी इस पर सिर्फ 10 ऑडियो ही अपलोड हो पाए थे की सर्वर की मेमोरी कम पड़ने लगी क्यूंकि यह ऑडियो स्ट्रीम हो रहे थे, मुझे यह तो पता था कि सर्वर पर लोड बढेगा पर इतनी जल्दी जबाब दे जायेगा इसकी उम्मीद नहीं थी। 

सर्वर के जबाब देने के बाद मैं फिर वहीँ आ गया जहाँ से चला था यानी कि समस्या अब भी जस की तस ऑडियो को कहाँ रखा जाए जिससे ब्लॉग पर उसको अटैच किया जा सके और साथ ही लम्बे समय तक कोई समस्या न आये। बहुत से ऑप्शन तलाशने के बाद भी मैं संतुष्ट नहीं हुआ। आखिरकार इस समस्या का एक समाधान मुझे मिला जो थोडा टेढ़ा है पर क्या हुआ, आखिर जूही भी कह चुकीं हैं की टेढ़ा है पर मेरा है :)

ऑडियो ब्लोगिंग के लिए टेढ़ा आइडिया
  • ऑडियो बनायें, 
  • ऑडियो को किसी वीडियो एडिटर में खोलें, अपने ऑडियो से सम्बंधित एक इमेज को चुनें (एक से ज्यादा भी चुन सकते हैं, इमेज का आकार 1280 x 720 px हो तो बेहतर है), 
  • अब इन इमेज और ऑडियो को जोड़ कर एक वीडियो बना लें
  • इस वीडियो को यू-ट्यूब पर पोस्ट करें
इस तरीके से मैंने अर्चना चाव जी का एक ऑडियो यू-ट्यूब पर पोस्ट किया नतीजा ये रहा-

है ना मजेदार? अगर सभी ऑडियो इस तरह से पोस्ट किये जाएँ तो हमें किसी और सर्विस के लिए रुपये नहीं खर्च करने पड़ेंगे। अब जो बाकी काम रह गया वो इन सभी पोडकास्ट को ब्लोगरों की किसी वेबसाईट पर दिखाने का तो वो तो मैं वैसे भी कर ही रहा हूँ- देखिये merablogsuno.com

ये तो ऑडियो की समस्या का समाधान हो गया अब एक और समस्या का समाधान करते हैं जो है ब्लोगरों का छोटे-छोटे समूह में बंट जाना। यदि आप पोडकास्ट बनाते हैं या बनाना चाहते हैं तो आप यह ऊपर बताये गए तरीके से यह काम कर सकते हैं, पर मैं चाहता हूँ की हम ग्रुप में यह काम करें मतलब हम एक ही यू-ट्यूब चैनल बनाएं, एक ही वेबसाईट पर सभी पोडकास्ट पोस्ट की जाएँ, जिससे हम ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपनी पोडकास्ट पहुंचा सकें। 

एक यू-ट्यूब चैनल होगा तो ज्यादा से ज्यादा सब्स्क्राइबर होंगे। एक वेबसाईट होगी तो पाठक एक ही जगह पर सभी पोडकास्ट सुन / देख सकते हैं। मार्केटिंग / मेंटेनेंस में खर्च कम होगा और साथ ही एड मिलने की संभावना भी बढ़ जायेगी।

इस मामले में आपका क्या कहना है?

03 जनवरी 2013

एक अध्यापक के लिए वेब २.० वेबसाइट

बहुत बात हो चुकी है इस बारे में कि एक वेब २.० वेबसाइट में क्या क्या होता है अब बात करते हैं कि यदि एक अध्यापक के लिए वेब २.० प्रौद्यौगिकी पर आधारित वेबसाइट बनानी हो तो उसमें क्या क्या होना चाहिए|

  • कंटेंट लिखने की सुविधा: एक अध्यापक सामान्यता वह भाषा  (HTML) नहीं जानता जिसकी सहायता से वह वेबसाइट पर लेख लिख सके इसलिए एक ऐसा टेक्स्ट एडिटर अध्यापक को मिलना चाहिए जिसकी सहायता से अध्यापक को अपने लेखों को फॉर्मेट करने में असुविधा ना हो|
  • ब्लॉग: ब्लॉग अध्यापक को वह सुविधा देगा जहां पर अध्यापक अपने विद्यार्थियों से सीधा संपर्क बना सकता है, यहाँ पर वह समय के अनुसार लेख लिख सकता हैं जैसे कि परीक्षा आने पर परीक्षा में कैसे लिखा जाए, छुट्टियों में क्या-क्या किया जाये, प्रोजेक्ट के नये-नये आइडिया इत्यादि|
  • कमेन्ट सिस्टम: ब्लॉग में तथा वेबसाइट के अन्य कंटेंट पर कमेन्ट की सुविधा होना अनिवार्य है जिससे आपको यह भी पता लगे कि आपके विद्यार्थी आपके लेखों के बारे में क्या विचार रखते हैं, क्या-क्या जानना चाहते हैं| विद्यार्थियों के विचारों को जानकार आप अपने आगे के लेखों के बारे में विचार कर सकते हैं|
  • पॉडकास्ट एम्बेड करने की सुविधा: जैसा कि पिछले लेख में बताया जा चुका है डिजिटल मीडिया को पॉडकास्ट कहा जाता है, आप वीडियो बना सकते हैं जिसे आप वीडियो शेयरिंग साइट जैसे कि यू-ट्यूब, वीमियो, ब्लिप.टी.वी. इत्यादि पर रख सकते हैं और उसके बाद उनको अपनी वेबसाइट पर एम्बेड कर सकते हैं| इसी प्रकार आप ऑडियो शेयरिंग साइट का प्रयोग करते हुए अपने ऑडियो पॉडकास्ट को किसी और साइट पर अपलोड करके उसको अपनी साइट पर एम्बेड कर सकते हैं अथवा उसका लिंक अपने विद्यार्थियों को दे सकते हैं| अपने डोक्यूमेंट को शेयर करने के लिए आप डोक्यूमेंट शेयरिंग साइट जैसे कि स्लाइडशेयर का प्रयोग कर सकते हैं| सामान्यता सभी पॉडकास्ट शेयरिंग वेबसाइट आपके कंटेट को एम्बेड करने की सुविधा प्रदान करतीं हैं|
  • टैग: मान लीजिए कि आप किसी एक बिषय पर कई पेज, ब्लॉग, वीडियो, ऑडियो इत्यादि अपनी वेबसाइट पर लिख चुके हैं, अब आप अथवा आपके विद्यार्थी इन सभी चीजों को एक ही साथ देखना चाहते हैं तो कैसे देखेंगे? टैग आपको यही सुविधा प्रदान करता है| टैग के जरिये आप अपने पूरे कंटेट को वर्गीकृत कर सकते हैं|
  • सिग्नल: किसी भी प्रकार की फीड की सुविधा आपकी वेबसाइट में होनी चाहिए जिससे आपकी वेबसाइट के अपडेट होने पर तमाम वेब एप्लीकेशन को आपकी वेबसाइट के अपडेट होने के बारे में पता चल जाए| ऐसी कई एप्लीकेशन हैं जिनका उपयोग विद्यार्थी फीड सब्सक्राइब करने के लिए करते हैं जैसे ही आपकी वेबसाइट पर नया कंटेंट जोड़ा जाएगा विद्यार्थी को अपनी एप्लीकेशन पर पता चल जाएगा और वह तुरंत ही आपके नये लेख को पढ़ लेगा| यदि फीड हर टैग के लिए उपलब्ध हो तब तो कहना ही क्या, इस स्थिती में आपके पाठकों की संख्या में काफी इजाफा होने की सम्भावना है|
  • सोशल बुकमार्किंग: जिससे आपके विद्यार्थी आपके लेखों को दूसरे विद्यार्थियों के साथ सोशल नेट्वर्किंग वेबसाइट पर शेयर कर सकें|


यह एक अध्यापक की वेबसाइट में होने वाले कुछ प्रमुख गुण हैं, पर जरूरत के हिसाब से इनमें इजाफा हो सकता हैं जैसे कि पब्लिकेशन का लिंक, विकी, टेस्ट लेने की सुविधा, यह लिस्ट जरूरत के हिसाब से काफी लंबी हो सकती है|

वेबसाइट पर आने वाले खर्चा:
वेबसाइट बनाने में मुख्य रूप से चार चीजों पर खर्चा करना पड़ता है-
  1. डोमेन नेम- यह सालाना खर्चा है आपको अपने लिए डोमेन नेम प्रतिबर्ष खरीदना होता है|
  2. होस्टिंग- यह वह जगह होती है जहां पर आपके बेबसाइट की फाइलें रखीं जाती हैं, यह अलग-अलग होस्टिंग सर्विस देने बाली कंपनी पर निर्भर करता है सामान्यता 1 GB स्पेस के लिए 500-1200 रुपये तक प्रतिबर्ष देने पड़ते हैं|
  3. वेबसाइट डेवलेपमेंट- वेबसाइट बनाने की प्रक्रिया को वेबसाइट डेवलेपमेंट कहा जाता है, इसमें आपकी वेबसाइट में आपके जरूरत के अनुसार बनाया जाएगा, यह एक बार लिया जाता है तथा जब भी आप कोई नया फीचर जोड़ना चाहें तब लिया जाता है|
  4. वेबसाइट मेंटेनेंस- यह किसी भी वेबसाइट के लिए बहुत महत्वपूर्ण है इसमें समय-समय पर वेबसाइट में आने बाली दिक्कतों को दूर करना, वेबसाइट का बैकअप लेना इत्यादि शामिल होता है|
मुख्य रूप से वेबसाईट बनाने में आने वाला खर्च आपकी जरूरत पर निर्भर करता है, पर यदि एक सामान्य वेबसाइट की बात करें तो डोमेन नेम तथा वेब-स्पेस लेने के बाद कोई वेब-डिजानर 8000-25000 रु. में आपके लिए यह वेबसाइट बना देगा फिर आगे आपकी जरूरतों के हिसाब से इसमें इजाफा हो सकता है|

अपने एक मित्र के लिए मैंने एक ऐसी वेबसाइट बनाई है आप http://rkthenua.in पर देख सकते हैं| यदि आप अपने लिए एक ऐसी वेबसाइट चाहते हैं तो मुझे संपर्क करें yogendra.pal3@gmail.com पर इसमें आपको सालाना 7000/- के लगभग खर्चा आएगा|

01 जनवरी 2013

वेब २.० तथा शिक्षक

जैसा कि इस पोस्ट के शीर्षक से स्पष्ट है, इस पोस्ट में मैं बात करूँगा कि कैसे एक शिक्षक वेब २.० का प्रयोग विद्यार्थियों को पढाने के लिए कर सकते हैं

सबसे पहले यह पता होना चाहिए कि वेब २.० क्या है? 
वेब प्रौद्यौगिकी को आये हुए तो काफी समय हो चुका है पर अपनी शुरूआती अवस्था में जो वेबसाइट्स बनीं वो स्टेटिक थीं, स्टेटिक का हिन्दी में अर्थ होता है स्थिर, इस तरह की वेबसाइट में वेबसाइट बनाने वाला जो अपने पेज पर लिख देता था उसको पढ़ने वाला पूरी दुनिया में इंटरनेट की सहायता से कहीं भी पढ़ सकता था, यह ठीक वैसा ही था जैसे हम किसी पुस्तक को पढ़ते हैं

जब हम पुस्तक को पढ़ते हैं तो हम उस पुस्तक में लिखी किसी बात से सहमत हो सकते हैं, किसी बात से असहमत, हमें कुछ सवाल भी सूझ सकते हैं और लेखक से उनके उत्तर को जानने की इच्छा हो सकती है, पर हम कैसे पूछें? किताब हमें इस तरह की कोई सुविधा नहीं देती ठीक ऐसा ही स्टेटिक वेबसाइट्स में भी होता है आप पढ़ सकते हैं पर लेखक से संपर्क नहीं कर सकते यानि ना ही अपने सवाल पूछ सकते हैं और ना ही अपनी सहमति अथवा असहमति दर्ज करा सकते हैं

वेब २.० शब्द का प्रयोग 1999 में प्रथम बार उन वेबसाइट्स के लिए किया गया था जो ऐसी प्रौद्योगिकी का प्रयोग करती हैं जो वेबसाइट में स्टेटिक पेज से कुछ ज्यादा प्रयोग करने की सुविधा प्रदान करती हैं एक वेब २.० प्रौद्यौगिकी पर आधारित वेबसाइट अपने प्रयोगकर्ताओं को आपस में बातचीत तथा सहयोग करने का मौक़ा प्रदान करती है, ऐसी वेबसाइट में प्रयोगकर्ता खुद एक लेखक हो सकता है सोशल नेट्वर्किंग साइट्स, ब्लॉग, विकीपीडिया, वीडियो शेयरिंग वेबसाइट, होस्टेड सर्विस, वेब एप्लीकेशन इत्यादि वेब २.० प्रौद्यौगिकी पर आधारित वेबसाइट के उदाहरण हैं

शिक्षकों के लिए वेब २.०-
वेब २.० शिक्षकों को पढाने के नये रास्ते दिखाती है सामान्यतया एक शिक्षक एक बार में बहुत कम लोगों को पढ़ा सकता है पर वेब २.० का प्रयोग करते हुए शिक्षक पूरी दुनिया में कहीं भी स्थित अनगनित विद्यार्थियों को पढ़ा सकता है और अपनी पहचान पूरी दुनिया में बना सकता है

वेब २.० प्रौद्यौगिकी का प्रयोग करके बनाईं हुईं वेबसाइट में निम्न सुविधाएं हो सकती हैं,

खोजने की क्षमता: एक वेबसाइट में काफी डाटा हो सकता है, पर यदि खोजने की क्षमता ना हो तो आपकी वेबसाइट के पाठकों को उनकी जरूरत की सामग्री खोजने में काफी मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए खोज करने की क्षमता किसी शिक्षक की वेबसाइट का एक महत्वपूर्ण अंग है

लिंक्स: लिंक्स तो वेबसाइट की जान होती हैं, लिंक्स का प्रयोग कई प्रकार से एक वेबसाइट पर किया जा सकता है| मुख्य रूप से लिंक दो प्रकार के होते हैं एक तो वो जो प्रयोगकर्ता को वेबसाइट से बाहर ले जाते हैं, यानि कि वो लिंक जो पाठक को और अधिक जानकारी देने वाली वेबसाइट पर ले जाते हैं, और दूसरे वो जो पाठक को इसी वेबसाइट पर रखते हैं, इनका प्रयोग एक पेज से दूसरे पेज पर ले जाने के लिए अथवा उसी पेज पर किसी एक टॉपिक से दूसरे टॉपिक पर ले जाने के लिए किया जाता है|

टैग: टैग का प्रयोग वर्गीकरण के लिए किया जाता है, यह वर्गीकरण किसी भी आधार पर हो सकता है जैसे कि विषय, अध्याय, आयु वर्ग, कक्षा, शिक्षक इत्यादि

एक्सटेंशन: एक्सटेंशन का अर्थ होता है किसी चीज को बढ़ा देना, वेबसाइट को एक एप्लीकेशन (सॉफ्टवेयर) का रूप देना एक्सटेंशन कहलाता है| जैसे कि एडोब रीडर, एडोब फ्लैश प्लेयर, माइक्रोसोफ्ट सिल्वरलाइट एक्टिव-एक्स, जावा, क्विक-टाइम, विंडोज मीडिया इत्यादि


सिग्नल: सिग्नल का अर्थ है सिंडिकेशन का प्रयोग करना, इसमें आर.एस.एस. तथा इसी प्रकार की फीड का प्रयोग करते हुए एक वेबसाइट दूसरी वेबसाइट अथवा एप्लीकेशन को बताती है कि वेबसाइट में नया कंटेंट जोड़ा गया है



सोशल वेब क्या है?
यह तो हुईं वह सुविधाएँ जो कि आपको वेब २.० का प्रयोग करने वाली वेबसाइट पर मिल जायेंगी, अब बात करते हैं सोशल वेब की जो वेब २.० का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। सोशल वेब का प्रयोग करते हुए प्रयोगकर्ता अपना नजरिया, राय, विचार तथा अनुभव ऑनलाइन टूल तथा ऑनलाइन प्लेटफोर्म का प्रयोग करते हुए करता है एक अध्यापक वेब २.० का प्रयोग विद्यार्थियों को पढाने के लिए कर सकता है



ब्लोगिंग: ब्लोगिंग का अर्थ होता है ऑनलाइन डायरी, ब्लॉग का प्रयोग करते हुए आप अपने लेख अपने विद्यार्थियों तक पहुंचा सकते हैं



विकी: विकी का अर्थ एक ऐसी वेबसाइट से होता हैं जहां पर हर किसी को कंटेंट लिखने की आजादी होती है, विकी पर ना सिर्फ अध्यापक बल्कि विद्यार्थी भी बदलाब कर सकता है, विकी को आप चाहें तो अपने स्कूल, क्लास अथवा कोचिंग के लिए बना सकते हैं



पॉडकास्ट: कम्प्यूटर के युग में पढ़ना-पढ़ाना सिर्फ लेखों तक ही सीमित नहीं है, आप पढाने के लिए ऑडियो, वीडियो, पी.डी.एफ. या इसी प्रकार के डिजिटल मीडिया का प्रयोग कर सकते हैं इन पॉडकास्ट को आप अपनी वेबसाइट पर रख सकते हैं अथवा किसी वीडियो शेयरिंग साइट, ऑडियो शेयरिंग साइट, स्लाइड तथा डोक्यूमेंट शेयरिंग साईट पर अपलोड करने के बाद उनको अपनी वेबसाइट पर अटैच कर सकते हैं



सोशल नेट्वर्किंग साइट: आजकल के विद्यार्थी फेसबुक जैसी सोशल नेट्वर्किंग साइट का बहुत प्रयोग करते हैं, इसलिए इस तरह की वेबसाइट पर विद्यार्थियों को पढाने पर उनको ज्यादा पढ़ने के लिए प्रेरित किया जा सकता है



सोशल बुकमार्किंग: बुकमार्क का अर्थ होता है चिन्हित कर देना, सामान्यतया हम उन चीजों को चिन्हित करते हैं जो हमको पसंद आतीं हैं ठीक इसी प्रकार सोशल बुकमार्किंग आपके पाठकों को उनकी पसंद के वेब-पेज को तमाम सोशल नेट्वर्किंग साइट पर शेयर करने की सुविधा करती है

28 जुलाई 2011

आंकड़े बोलते हैं - ब्लॉग से कमाई

आप लोग अभी तक मेरे दो लेख "ब्लोगिंग से कमाई, मैं तैयार हूँ, आप?" तथा "ब्लोगिंग से कमाई" पढ़ चुके हैं, उन दोनों लेखों में मैंने आपको खूब सपने दिखाए, आपको भरोसा दिलाया की आप भी कमा सकते हैं, और मुझे बहुत खुशी है कि कई लोगों ने इसमें दिलचस्पी दिखाई है,
इस सीरीज के मेरे पहले लेख के प्रकाशित होने के बाद मुझे लगातार फोन तथा ई-मेल आ रहे हैं, कुछ लोग मेरे साथ आने की इच्छा दिखा रहे हैं तथा कुछ लोग अपने अनुभव मेरे साथ बाँट रहे हैं :)

आज मैं आपके समक्ष कुछ आंकड़े प्रस्तुत करूंगा जिससे आपको -
  1. मेरी बातों पर विश्वास हो जाये,
  2. पता चल जाये कि आपको कितना धैर्य रखना है,
  3. आप इन आंकड़ों के आधार पर सही दिशा में आगे बढ़ सके

एडसेंस से मुझे अब तक $100.69 यानि कि रू. 4441.94 की आय हो चुकी है, यह चित्र पिछले माह का है, इसके बाद पेमेंट भेज दिया गया और वापस मेरे अकाउंट में इस माह $12.41 की आमदनी हो चुकी है

कैसे शुरू हुआ यह सब? 
सबसे पहले फरवरी 2009 में मैंने वेबसाईट बनाई http://www.learnbywatch.com जिसे बनाने में मुझे लगभग एक माह का समय लगा, उसके बाद अक्टूबर 2009 में गूगल एडसेंस के लिए आवेदन किया और आवेदन मान लिया गया, तो आपने जो ऊपर की कमाई देखी हैं वो अक्टूबर 2009 से जून 2011 तक की है, किये गए कार्य तथा कमाई का सम्बन्ध आपको मैं नीचे दिए गए ग्राफ में दिखा रहा हूँ

अब जरा इस ग्राफ को समझते हैं, नीले रंग की रेखा कमाई दिखा रही है जो कि डॉलर में है तथा लाल रंग की रेखा दिखा रही है इस कार्य को दिया गया समय ( प्रतिदिन / घंटा ), तो जैसा कि आप देख रहे हैं,
  1. लगातार आठ माह तक प्रतिदिन चार घंटे कार्य किया (यह वेबसाईट को बनाने का कार्य है, क्यूंकि उस समय तक मुझे बेहतरीन वेबसाईट बनानी नहीं आतीं थीं, अब तो मेरे विद्यार्थी भी वेबसाईट को सिर्फ कुछ घंटों में बना कर तैयार कर देते हैं
  2. आठवा माह जहाँ से नीली रेखा प्रारंभ होती है वह है जब एडसेंस अकाउंट एक्टिव हुआ था (अब गूगल अकाउंट को एक्टिव करवाने में अधिकतम 7 दिन का समय लगता है) 
  3. तेरहवां माह जो आप देख रहे हैं जहाँ पर नीली रेखा ने $2 की आमदनी को पार नहीं किया था, यह वो समय है जब तक मुझे सर्च इंजन की कार्य प्रणाली के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, जिसको दूर किया तथा चौदहवें माह से आप खुद ही देख सकते हैं कि फिर आमदनी $2 से नीचे आई ही नहीं :)
  4. 23वां माह जहाँ आपको दिखाई दे रहा है कि 4 घंटे प्रतिदिन कार्य किया यह वो समय है जब "अपना ब्लॉग" को बनाया, तथा इसी माह में यूट्यूब की पार्टनरशिप मिल गयी :) जिसके बाद आप देख ही रहे हैं किसी भी माह में $8 से कम की आय नहीं हुई है :)
  5. इस ग्राफ में गौर कीजिये कि मैं अब सिर्फ प्रतिदिन मात्र आधा घंटा इन कार्यों को देता हूँ, पर आय में उसकी वजह से कोई कमी नहीं है 
उम्मीद है ग्राफ आपको समझ में आ गया होगा, कुछ और आंकड़े बताते हैं, कि
  • LBW यानि learnbywatch.com पर अभी तक कुल 20,700 बार गूगल एडसेंस के द्वारा एड दिखाए गए हैं, कुल 289 क्लिक हुए जिनसे $24.91 की आय हुई है, तथा 
  • apnablog.co.in पर अभी तक कुल 65,094 बार गूगल के द्वारा एड दिखाए गए हैं, कुल 36 क्लिक हुए हैं जिनसे कुल $3.81 की आय हुई है 
यहाँ पर एक बात गौर करने लायक है "अपना ब्लॉग" पूरी तरह से हिन्दी में है, LBW दोनों भाषाओं में है पर उस पर ब्लॉग सिर्फ हिन्दी में है, इससे निष्कर्ष निकलता है कि हिन्दी में भी गूगल एडसेंस पूरी तरह कार्य करता है सिर्फ अच्छी तरह से इम्प्लीमेंट करना आना चाहिए :)

"अपना ब्लॉग" पर दूसरी वेबसाईट के मुकाबले तीन गुना ज्यादा बार गूगल ने एड दिखाए पर उस पर क्लिक दूसरी वेबसाईट के मुकाबले आठ गुना कम हुए हैं कारण-
  • अधिकतर ब्लोगर एड पर क्लिक नहीं करते (शायद उनके लायक कोई एड आता ही नहीं)
  • ज्यादा से ज्यादा 1000 ब्लोगर हैं जो सक्रिय हैं
  • कुछ ब्लोगर एड ब्लोकर का प्रयोग करते हैं
अपना ब्लॉग पर आज की तारीख में 1,00,000 से ज्यादा लेख हैं, और LBW पर मात्र 30 फिर भी LBW से ज्यादा आमदनी हो रही है जबकि "अपना ब्लॉग" का अपना खर्चा निकालना भी मुश्किल हो रहा है क्यूंकि-
  • ब्लोगर सिर्फ पहले पन्ने पर ही जाते हैं (ऐसा मुझे गूगल एनालिटिक्स के आंकड़े देख कर पता चला है), और अधिकतर को विषय वस्तु से सम्बन्ध नहीं है, सिर्फ नया लेख पढना (अथवा देखना) है और उस पर टिप्पणी देनी है क्यूंकि उससे उनके लेख पर टिप्पणी आयेगी और एक आत्म-संतुष्टी मिलेगी
अपना ब्लॉग पर प्रतिदिन 100 के औसत से विजिट होते हैं, जबकि LBW पर मात्र ३० के औसत से फिर भी आय में इतना अंतर है क्यूंकि-
  • LBW के टार्गेट यूजर सिर्फ भारत में ही लाखों में हैं और गूगल सर्च से स्वतः ही उस पर आते हैं, पिछले छः माह से LBW पर मैंने लोगिन तक नहीं किया है (सही आंकड़े जुटाने के लिए) और प्रतिदिन 30 के औसत से अच्छी गुणवत्ता वाला ट्रैफिक LBW पर आता है,
  • अपना ब्लॉग पर वही गिने चुने 1000 लोग में से 100 लोग विजिट कर लेते हैं यानि सही गुणवत्ता का ट्रेफिक अपना ब्लॉग की तरफ रुख नहीं कर रहा है 
  • सच यह है कि LBW कई लोगों की जरूरत है जबकि "अपना ब्लॉग" शायद किसी की नहीं
अभी तक हुआ कुल खर्चा-
  • LBW पर - 3200/- रु. मात्र
  • अपना ब्लॉग पर - 1500/- रु. मात्र 
हालांकि अब अपना ब्लॉग को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रतिबर्ष लगभग 60,000 रु. की आवश्यकता है, क्यूंकि उस पर लेख बहुत ज्यादा हो चुके हैं तथा एग्रीगेशन को बहुत प्रोसेसिंग की आवश्यकता होती है, मुझे दो बार होस्टिंग कंपनी से नोटिस मिल चूका है और अगला नोटिस नहीं मिलेगा सीधे वेबसाईट को बंद कर दिया जायेगा :(

मित्रो जो आपने ऊपर आंकड़े तथा आय देखी है वह सिर्फ गूगल एडसेंस से होने वाली देखी है, इसमें मैंने कई चीजें शामिल नहीं कीं जैसे कि प्रसिद्धि, कई ऐसी चीजों का ज्ञान जो अन्यथा नहीं हो पाता, तथा आप लोगों की मदद इसके आलावा मेरी प्रोग्रम्मिंग की वीडिओ सी.डी. जिसकी कीमत 580 रु. है, प्रतिमाह मेरे विद्यार्थियों की संख्या में 100 के लगभग की बढ़ोत्तरी हो जाती है)

मैंने सभी आंकड़े आपके समक्ष प्रस्तुत कर दिए हैं जिससे आप आगे की योजना निर्धारित कर सकें, इन आंकड़ों से मैं इन निष्कर्ष पर पहुंचा हूँ कि-
  • ऐसा ब्लॉग अथवा वेबसाईट बनाओ जो कि अधिक से अधिक लोगों की जरूरत पूरी करती हो
  • वेबसाईट / ब्लॉग को कठोरता के साथ सर्च इंजन के लायक बनाओ
  • वेबसाईट/ब्लॉग को यूजर फ्रैंडली बनाओ, जो एक बार आये तीन चार मिनट से पहले जा ना पाए तथा बार बार आये
मैं चाहता हूँ कि इन आंकड़ों के आधार पर आप किस निष्कर्ष पर पहुंचे यह कमेन्ट में लिखें, जिससे बेहतर निष्कर्ष पर पहुंचा जा सके

पिछले लेख में मैंने "अभी क्या करें" सेक्शन में आपको कुछ करने के लिए कहा था, यदि आपने वह कार्य कर लिया हो तो 

अभी क्या करें-
  1. आपने जो वेबसाईट की लिस्ट तैयार की थी सोचिये कि वह कितने लोगों की जरूरत पूरी करती है, क्या वह सर्च इंजन पर आती है (वेबसाईट का नाम नहीं डालना है, बल्कि ऐसा कोई शब्द डालना है जिसको आप साधारणतया खोजने के लिए प्रयुक्त करते), तथा यदि आप उस वेबसाईट पर जाते हैं तो आप कितनी देर तक उस पर रुके रहते हैं
  2. अब सोचिये कि आपके दिमाग में जो आइडिया है वह कैसे इन तीनों बिन्दुओं पर खरा उतर पायेगा
यदि आपको कोई दिक्कत हो रही है तो कोई बात नहीं, क्यूंकि मैं बहुत जल्द अपने प्रोजेक्ट प्रस्तुत करूंगा जो इन बिन्दुओं पर पूरी तरह खरे उतर रहे होंगे, ठीक वैसे ही आप भी ऐसा कर सकते हैं
<--ब्लोगिंग से कमाई                          पहला प्रष्ठ^

      25 जुलाई 2011

      ब्लोगिंग से कमाई

      तो बात चल रही थी कमाने की, क्या आप कमाना चाहते हैं? बिलकुल! अच्छा है.. बहुत अच्छा है कमाना ही चाहिए, पर असली सवाल यह है की कितना कमाना चाहते हैं?

      यकीन मानिए लोग इतना कमा रहे हैं जितना आपके आस पास कोई भी नहीं कमा रहा है, पर क्या आप कमा सकते हैं? हाँ, बिलकुल कमा सकते हैं, पर जल्दी नहीं उसके लिए समय चाहिए, जो लोग इंटरनेट से कमा रहे हैं वो लोग आज से नहीं कमा रहे हैं बल्कि उन्होंने बहुत समय पहले कमाना शुरू किया था तब वो लोग मात्र 10 रु. प्रतिमाह कमा रहे थे, पर आज वो लोग इतना कमा रहे हैं जितना गिना नहीं जा सकता|
      मैं मेरा उदाहरण देना पसंद करूंगा आज से लगभग २ साल पहले मैं मात्र (इंटरनेट से) 1 रु. प्रतिदिन कमा रहा था, पर आज मैं 50 रु. से 60 रु. प्रतिदिन (इंटरनेट से) कमा रहा हूँ (भले ही में कार्य करूं अथवा नहीं), और वो भी इसलिए क्यूंकि मुझे ज्यादा समय नहीं मिलता है, यदि आप मेरे तथा कई अन्य ब्लोगरों की सक्रियता को देखेंगे तो मुझे कम सक्रीय पायेंगे, मैं एक-एक कदम प्लान करने के बाद रखता हूँ, सिर्फ "अपना ब्लॉग" को प्रारम्भ करने का निर्णय बिना प्लान के लिया था (और शायद इसलिए वह सफल नहीं है) यदि मेरे प्लान के हिसाब से चला जाये तो "कोई भी" (इस कोई भी के बारे में कुछ देर में चर्चा करेंगे) मात्र २ साल के अन्दर ६००-८०० रु. प्रतिदिन कमा सकता है (इस सम्बन्ध में आंकड़ों के साथ चर्चा करूंगा)

      कोई भी? हाँ भी और नहीं भी, यदि कोई भी कमा सकता है तो इतने साल हो गए इंटरनेट को आये हुए लोग क्यूँ नहीं कमा रहे हैं? बेरोजगारी फिर किसलिए है?

      मैनपुरी में लोगों से इस मामले में चर्चा करते समय कुछ बेरोजगार युवकों के उत्तर आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ-
      1. सरकारी नौकरी ही चाहिए भले ही 8000/- प्रति माह ही क्यूँ ना मिले,
      2. आप तो इतने पढ़े लिखे हो, इतनी जानकारी है इसलिए कमा लेते हो मैं नहीं कमा पाऊंगा
      3. यदि इतना कमा ही लेते हो, तो यहाँ कोचिंग क्यूँ खोली, कमाते क्यूँ नहीं हो?

      लोग मुझे ऐसे देखते हैं जैसे मैं दुसरे गृह से आया हुआ प्राणी हूँ, उनको सपने दिखा रहा हूँ, लोग समझना ही नहीं चाहते की पहली बात है खुद पर विश्वास करना तभी आप कमा सकते हो या फिर कुछ और कार्य कर सकते हो-

      पर क्या सच में कोई भी कमा सकता है? यदि आप इन प्रश्नों के उत्तर हाँ में देते हैं, तो, मेरा उत्तर है हाँ,

      प्रश्न १ : क्या आपके अन्दर कोई ऐसी चीज है जो सामान्यतः लोगों के पास नहीं होती है? 
        उदाहरण के तौर पर मैं पढ़ाने में बहुत अच्छा हूँ, मेरे समझाने का तरीका बहुत अच्छा है और मैं गारंटी देता हूँ कि वेवकूफ से वेवकूफ बच्चे को मैं क्लास के सबसे तेज बच्चे से ज्यादा नंबर लाने लायक बना दूंगा सिर्फ आठ से दस महीने पढ़ाकर (हाँ, उस बच्चे के माता-पिता तब मेरे आस-पास भी ना फटकें, क्यूंकि मेरा पढ़ाने का तरीका उनको पसंद नहीं आएगा, :D )
        प्रश्न २ : क्या आपके अन्दर धैर्य है? 
          यदि नहीं है तो आप इंटरनेट के माध्यम से कमाने के लिए पैदा नहीं हुए हैं, इसके लिए धैर्य चाहिए, बहुत धैर्य चाहिए
          प्रश्न ३ : क्या आपको लगता है कि आप उन चीजों से भी कमा सकते हैं जिनको हम शौक (HOBBY) कहते हैं?
            यदि नहीं, तो भी घबराने वाली बात नहीं है, क्यूंकि मेरी यह सीरीज ख़त्म होते-होते आपके अन्दर यह विश्वास आ जायेगा :)
            यदि आपने पहले प्रश्न का उत्तर "ना" में दिया है तो आप नहीं कमा सकते, इसलिए नहीं क्यूंकि आपमें कुछ हटकर (जिसे मैं X फैक्टर कहता हूँ) नहीं है, बल्कि इसलिए कि आपमें आत्मविश्वास नहीं है, आज तक ऐसा कोई व्यक्ति ही पैदा नहीं हुआ जिसके पास कुछ ऐसा ना हो जो बाकी लोगों से अलग है, अंतर सिर्फ इतना होता है कि वह व्यक्ति हमेशा इससे अनजान रहता है और अपनी प्रतिभा को समय के साथ धीरे-धीरे समाप्त कर देता है :(

            यदि आपने दुसरे सवाल का जबाब ना में दिया है तो आप मेरे अगले लेख का इंतज़ार कीजिये क्यूंकि हो सकता है उसके बाद आपमें धैर्य पैदा हो जाए या आप पहले के मुकाबले जल्दी कमाने लगें :)

            यदि आपने तीसरे तथा अंतिम सवाल का उत्तर ना में दिया है तो कोई बात नहीं उसका कुछ करना भी नहीं है, सिर्फ अंतर इतना है कि आप खुद से नहीं कमा सकते पर मैं आपको आपके शौक से कमाने का ना सिर्फ रास्ता देने वाला हूँ बल्कि आपको उसमे पूरी मदद भी करने वाला हूँ :)

            यदि आपने तीनों सवालों के उत्तर हाँ में दिए हैं, तो आपको मेरी मदद की जरूरत नहीं है, आप अपने आप भी कमा सकते हैं सिर्फ मेरे इन लेखों को ध्यान से पढ़ते रहें, तथा कोई भी समस्या होने पर मुझे जरूर बताएं

            अब आते हैं मुद्दे की बात पर, क्या है मुद्दा? मुद्दा है क्या मैं इंटरनेट के माध्यम से कमा सकता हूँ? ठीक है... एक बात बताइये, दोपहर का वक्त है आप अपने घर पर आराम फरमा रहे हैं, आपकी डोर-वेल बजी आप बाहर जाने पर देखते हैं कि एक सेल्समैन है, आपको ताले बेचने आया है, बहुत अच्छी कंपनी के ताले हैं और आपको बहुत सस्ते में दे रहा है, क्या आप खरीदेंगे? सवाल को उल्टा कर देते हैं, क्या आप उस सेल्समैन को कमाई करने का मौका देंगे? हो सकता है आप खरीदें और हो सकता है आप ना खरीदें|

            अब आते हैं दूसरी परिस्थिति पर, आप परिवार सहित स्लीपर में यात्रा कर रहे हैं, आप सभी ने मजे से खाना खाया और सोने की तैयारी करने लगे, तभी आप देखते हैं कि सामान को बाँधने के लिए आप चैन तो ले आये हैं पर ताला नहीं लाये हैं, अब क्या होगा, रात हो चुकी है- तभी गाडी एक स्टेशन पर रुकती है आप भाग कर बाहर जाते हैं और कहीं से ताला खरीदने की व्यवस्था करते हैं, बहुत ही घटिया कंपनी का ताला है पर दुकानदार आपसे बहुत ज्यादा रुपये मांग रहा है, क्या आप देंगे? :) आप क्या आपका ..... भी देगा, है या नहीं? हा हा हा

            स्थिति समझिये- पहली स्थिति में आपकी जरूरत नहीं थी इसलिए आपने एक व्यक्ति को कमाने का मौका नहीं दिया, दूसरी स्थिति में आपकी जरूरत थी इसलिए एक व्यक्ति आपसे ज्यादा कमा कर ले गया

            कुछ समझे? नहीं !! बहुत सीधी बात है यदि आप किसी की जरूरत पूरी कर सकते हैं तो आप कमा सकते हैं अन्यथा कोई फायदा नहीं?

            अब मैंने अपने पहले सवाल को बहुत ही आसान बना दिया है, अगला लेख आने तक सोचिये कि आप इंटरनेट के जरिये किसी की क्या जरूरत पूरी कर सकते हैं? सिर्फ इसको सोचते समय एक बात ध्यान रखिये कि इंटरनेट आपका गाँव नहीं है जहाँ गिने चुने लोग रहते हैं, पूरा विश्व यहाँ रहता है (और ज्यादातर वो जो रूपया खर्च करने की औकात रखते हैं) मुझे पूरी उम्मीद है कि आप इतने गए गुजरे नहीं होंगे जो इस पूरे विश्व में एक व्यक्ति की जरूरत भी पूरी ना कर पायें... है ना!!

            अभी करें-
            1. सोचें की इंटरनेट के जरिये आप किस की जरूरत पूरी कर सकते हैं , तथा उसको पेपर पर लिख लें
            2. अपने तीन शौक एक पेपर पर लिखें
            3. देखिये ऐसी कौन-कौन सी वेबसाईट हैं जो आपके शौक को पूरा करने में आपकी मदद कर रहीं हैं, तथा प्रत्येक शौक के लिए सबसे अच्छी 5 वेबसाईट को पेपर पर लिख लें

            23 जुलाई 2011

            ब्लोगिंग से कमाई!! मैं तैयार हूँ, आप?

            आपको शायद ध्यान हो मैंने अपनी एक पोस्ट में सामूहिक ब्लोगिंग के लिए कुछ आइडिया आप लोगों को बताये थे, पर उन आइडिया को इम्प्लीमेंट करने के लिए मेरे पास समय की कमी थी, पर अब मैं तैयार हूँ कुछ बड़ा और बेहतर करने के लिए, मुझे चाहिए आप में से कुछ लोग (20 - 40)| मैं ब्लोगिंग को कमाई का जरिया बनाना चाहता हूँ और अकेले ना तो कमा सकता हूँ और ना ही कमाना चाहता हूँ :)

            मित्रों आज तथा आने वाले कुछ दिनों तक पूरी तरह से कमाने की बात होगी, चर्चा का मुख्य विषय होगा ब्लॉग अथवा इसके जैसी विधाओं से कैसे कमाया जा सकता है? 

            सीरीज से सम्बंधित कुछ ख़ास बातें:
            1. इस सीरीज में जो कुछ भी प्रकाशित होगा उसको एक पुस्तक के रूप में आपके समक्ष प्रस्तुत कर दिया जायेगा जिससे आप डाउनलोड कर सकें तथा ऑफलाइन होने पर भी पढ़ सकें,
            2. इस सीरीज में जो कुछ भी बताया जा रहा है उसको तब तक नहीं आजमायें जब तक की यह सीरीज पूरी नहीं हो जाती अन्यथा आप अपना नुकसान कर बैठेंगे,
            3. इस सीरीज के अंत में मैं आपको मेरे द्वारा प्रारंभ होने वाले कुछ प्रोजेक्टों के बारे में जानकारी दूंगा, जिसमें यदि आप चाहें तो भाग ले सकते हैं, जिसके जरिये आपके कमाने के मौके पहले के मुकाबले कई गुना बढ़ जायेंगे
            4. मेरे यह प्रोजेक्ट ख़ास तौर पर गृहणियों, बच्चों, रिटायर्ड व्यक्तियों तथा बेरोजगार युवकों के लिए होंगे
            5. मेरे इन प्रोजेक्ट की बारीक से बारीक जानकारी इन लेखों में दी जायेगी और यदि आप चाहें तो आप भी इन  प्रोजेक्ट को अपना सकते हैं, और इन आइडिया को इम्प्लीमेंट करने में मेरी मदद भी ले सकते हैं,
            6. इस सीरीज में जो भी बातें आपको बताईं जायेंगी वो मैंने एक दिन में नहीं सीखीं हैं, बहुत धीरे-धीरे कई चीजों पर नजर रख कर, कई पुस्तकें पढ़ कर तथा बहुत रुपये खर्च करके सीखीं हैं, उसके बाद भी इनमें कमी हो सकती है इसलिए मैं चाहता हूँ कि तकनीकी के जानकार लोग जैसे कि पाबला जी, शाहनबाज भाई, रवि रतलामी जी, रतन सिंह शेखाबत जी तथा आप, इन लेखों में मिलने वाली गलत बात को तर्क के साथ काटें तथा मुझे सही रास्ते से परिचित करवाएं
            7. इन लेखों के लिंक आप चाहे जहाँ दे सकते हैं, पर इन लेखों को की नक़ल अपनी किसी भी वेबसाईट अथवा ब्लॉग पर करना सख्त मना है 
            प्रस्तुत है इस सीरीज का प्रथम लेख-

            गूगल एडसेंस जिंदाबाद
            पिछले 2 बर्षों से कमाने के मौके देने वाली साईट को देख-परख रहा था और कई वेबसाईट को जांचने के बाद मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूँ की प्रारंभ में कमाई करने के लिए एडसेंस से बेहतर कुछ नहीं है, यह विचार मेरे दिमाग में बहुत पहले से थे पर मैं पहले यह देख लेना चाहता था की एडसेंस से ठीक-ठाक आय हो सकती है या नहीं और पैसे समय पर मिल जाते हैं या नहीं? और एडसेंस पर पूरा भरोसा होने के बाद अब वक्त है अपने विचार आपको बताने का और उनमे आपको शामिल करने का हालांकि मैं पूरी तरह गूगल एडसेंस पर निर्भर नहीं हूँ पर बाकी सभी रास्ते तब खुलते हैं जब हम कुछ बड़ा कर चुके होते हैं, प्रारंभ में गूगल ही मदद करता है

            ढूंढिए मनुष्य की कमजोरी-
            इसको कमजोरी ना कह कर यदि जरूरत कहा जाए तो ज्यादा उचित होगा क्यूंकि कोई भी व्यक्ति तभी रुपये खर्च करेगा जब उसको कुछ ना कुछ जरूरत होगी, याद रखिये कोई खर्च करेगा तभी तो आपको रूपया मिलेगा :) उदाहरण के लिए मनोरंजन एक बहुत बड़ा उद्योग है, मनोरंजन में फ़िल्में, गीत, गेम, फैशन शो और कभी कभी समाचार भी आ जाते हैं, ये वो चीजें हैं जिनकी तरफ व्यक्ति खुद आकर्षित होता है तथा इन पर रुपये खर्च करने के लिए तैयार रहता है, और मनोरंजन के बिषय में सबसे अच्छी तथा बड़ी बात यह है की हर किसी की जरूरत है

            ठीक ऐसे ही पिछले कुछ बर्षों में शिक्षा एक बहुत बड़े उद्योग के रूप में उभर कर आया है, व्यक्ति अपने लिए कुछ सुख सुविधाएँ छोड़ देता है पर कोशिश करता है की अपने बच्चों को उचित शिक्षा दिलाई जाये, हालांकि मनोरंजन के मुकाबले इस क्षेत्र में आबादी की कमी है पर मनोरंजन के मुकाबले इस क्षेत्र में रुपये अच्छे मिलने की संभावना रहती है

            अब उदाहरण लेता हूँ शौक का, शौक किसी भी चीज का हो सकता है उदाहरण के तौर पर मुझे कराटे, गिटार तथा पढने-पढ़ाने का बहुत शौक है, मैगजीन, कार्टून, कोमिक्स, नोबल, उपन्यास मेरे परम मित्र हैं किसी भी क्षण वो आपको मुझसे अलग नहीं दिखेंगे कहने का अर्थ है की पढने-पढ़ाने का मैं पागलपन की हद तक शौक़ीन हूँ, इस क्षेत्र में अच्छे रुपये मिलने की संभावना रहती है पर इसके लिए बिशेष मेहनत करनी पड़ती है क्यूंकि यदि कोई व्यक्ति दीवानगी की हद तक किसी चीज के प्रति पागल है तो वह बहुत कुछ पाने की कोशिश करेगा और आपको भी उसकी इच्छा पूरी करने के लिए दीवानगी की हद तक पागल होना चाहिए  

            धैर्यवान
            यह गुण नया नहीं है, यह हर क्षेत्र में कार्य करते समय होना चाहिए, ऑनलाइन कमाई करना भी ठीक वैसा ही है, बहुत धैर्य की आवश्यकता होती है तथा अन्य क्षेत्रों के मुकाबले यहाँ कुछ ज्यादा ही धैर्य रखना पड़ता है, पर जैसा की आप जानते हैं की धैर्य का फल मीठा होता है, इस क्षेत्र में भी ठीक वैसा ही है सिर्फ अंतर इतना है की बाकी क्षेत्रों के मुकाबले यहाँ कुछ ज्यादा ही मीठा होता है, यानि की यहाँ रुपये कमाने की संभावना सामान्य से ज्यादा होती है
             
            ऑनलाइन कमाने के लिए कुछ शर्तें-

            पहली शर्त: सिर्फ एक ही चीज पर अपना पूरा ध्यान लगा दीजिये (मैंने देखा है यहाँ ब्लॉगजगत में कुछ लोग सब कुछ करने की कोशिश करते हैं और कुछ भी नहीं कर पाते) मैं यहाँ पर तीसरा खम्बा का उदाहरण देना पसंद करूंगा तीसरा खम्भा एक ऐसा ब्लॉग है जो सिर्फ और सिर्फ एक ही बिषय पर केन्द्रित है,

            दूसरी शर्त: आपके द्वारा प्रदान की जा रही सुविधा या जानकारी किसी ना किसी के काम की होनी चाहिए, यहाँ पर मैं माफी चाहूँगा पर कविता तथा कहानी वाले ब्लॉग किसी के काम के नहीं होते, असल में कविता तथा कहानी लोगों की मजबूरी नहीं होते, और बहुत साफ़ शब्दों में कहूं तो कविता तथा कहानी के ब्लॉग से कमाई करने के बारे में सोचना अपना समय बर्बाद करना है (यदि आपका ब्लॉग कहानी तथा कविता का है तो निराश ना हों, मैं अपने एक लेख में सिर्फ कविता तथा कहानी के ब्लॉग से कैसे कमाया जाये बिषय पर ही चर्चा करूंगा)

            तीसरी शर्त: कुछ अलग सोचने की क्षमता, कारण बहुत आसान है ये बातें जो मैं आपको इस लेख में बता रहा हूँ वो आपको क्या लगता है, लोगों को पता नहीं होंगी? हा हा हा !! लोगों को पता है और लोग भी यही करेंगे जो आपको मैं बता रहा हूँ, असल में करते ही हैं फिर आप कहाँ टिकेंगे? इसलिए क्या आप कुछ अलग सोचने की क्षमता रखते हैं?

            चौथी शर्त: सोचिये की आपके पाठक क्या चाहते हैं, ना की ये की आपके हिसाब से क्या सही है!! एक उदाहरण लूँगा मेरे एक मित्र सिर्फ इसलिए अपनी एम.टेक की पढाई उत्तीर्ण नहीं कर पाए क्यूंकि वो सिर्फ वह प्रस्तुत करते थे जो उनको अच्छा लगता था, जो चीज उनको अच्छी नहीं लगी उसको वह प्रस्तुत नहीं करते थे, क्यूँ भाई? अरे यार तुमको पास कौन करेगा? अध्यापक, तो उनको आप वो क्यूँ दे रहे हो जो आप देना चाहते हो? वो दो ना यार जो उनको अच्छा लगता है बहुत सीधा सा हिसाब है यहाँ अधिकतर ब्लोगर ब्लोगिंग के वीडिओ चाहते हैं और मैं यदि आपको सी प्रोग्रामिंग के वीडिओ देने लगूं तो? आप लोगे? नहीं ना तो बस ऐसे ही वो प्रस्तुत करो जो लोग चाहते हैं ना की वो जो आप चाहते हैं

            पांचवीं तथा अंतिम शर्त: तकनीकी की पूरी जानकारी, पूरी जानकारी यदि आपको ना भी हो तो भी चलेगा क्यूंकि मैं आपकी पूरी मदद करने वाला हूँ इस मामले में मेरी इस पूरी सीरीज में आपको आपके हर सवाल, क्या करना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए, कैसे पता लगायें की सामने वाला क्या चाहता है तथा ऐसी विधाओं से कैसे कमायें जिसमें लोग बिल्कुल भी रुपये खर्च नहीं करना चाहते, इत्यादि विषय पर बहुत विस्तृत वर्णन करूंगा, कहने का अर्थ यह है की इस पूरी सीरीज के समाप्त होने पर आपको तकनीकी की जानकारी में कुछ भी बचेगा नहीं

            बिशेष:
            • इस सीरीज के लेख मेरे इस ब्लॉग पर हर शनिवार, सोमवार तथा बुधवार को सुबह आठ बजे प्रकाशित होंगे अतः समय का ध्यान रखें,
            • यदि आप एक बेरोजगार युवक हैं तो इन लेखों पर ख़ास निगाह रखें सिर्फ इतना ध्यान रखें कि पहला ध्यान एक अच्छे कैरियर पर होना चाहिए,
            • आपके सुझाव का स्वागत है, निंदकों का ख़ास तौर पर क्यूंकि मैं चाहता हूँ कि यह सीरीज ज्यादा से ज्यादा विस्तृत हो 
             अभी करें-
            • यदि आप फिल्मों तथा फ़िल्मी-गीतों के शौक़ीन हैं और आप मेरे इस प्रोजेक्ट में शामिल होना चाहते हैं तो मुझे संपर्क करें मेरे मोबाइल नंबर 9022419053 पर, 
            • यदि आप अध्यापक हैं अथवा पढने पढ़ाने में रूचि रखते हैं तथा हाई-स्कूल / इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों को पढ़ाने की क्षमता रखते हैं तथा मेरे प्रोजेक्ट में शामिल होना चाहते हैं तो मुझे संपर्क करें मेरे मोबाइल नंबर 9022419053 पर,
            • यदि आपके दिमाग में बहुत दिनों से कोई आइडिया कुलबुला रहा है पर आप उसको कैसे इम्प्लीमेंट करें यह तय नहीं कर पा रहे हैं तो मुझे अपनी पूरी समस्या डिटेल के साथ मेल कीजिये मेरे ई-मेल एड्रेस (yogendra.pal3@gmail.com) पर, आपकी पूरी जानकारी गुप्त रखी जायेगी

            05 जुलाई 2011

            मेरे विद्यार्थियों की पहली वेबसाइट



            प्रिय ब्लोगरों,

            पिछले दिनों मैं मैनपुरी गया था, कुछ विद्यार्थियों को द्रुपल सिखाने| उम्मीद यह की थी कि विद्यार्थी अपने पैरों पर खड़े हो जायेंगे क्यूंकि द्रुपल आज की जरूरत है तथा इसमें रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं|

            तीन विद्यार्थियों ने द्रुपल सीखने के लिए रजिस्टर कराया था श्रद्धेय जौहरी, रिजवान खान, तथा निखिल कुमार| सच कहूँ तो मुझे तीन भी ज्यादा ही लगे क्यूंकि मैनपुरी के विद्यार्थी यह सोच ही नहीं सकते कि वे मात्र 12 दिन के कोर्स में वेबसाइट बनाना सीख जायेंगे :)

            पर मुझे विश्वास था कि वो ऐसा कर पाएंगे, पर मैं उनको यह बोल कर नहीं बताना चाहता था बल्कि चाहता था कि वो ऐसा खुद महसूस करें, इसलिए मैंने कोर्स खत्म करने के बाद उनको किसी रियल प्रोजेक्ट में कार्य करवाना ही उचित समझा|

            और उनको एक अध्यापक की वेबसाइट बनाने का मौका दिया, आगे में क्या कहूँ आप खुद ही देख लीजिए जो वेबसाइट उन्होंने तैयार की है उसको आप इस लिंक पर जा कर देख सकते हैं - Raj Kumar Thenua | An Asst. Professor's Website

            इस वेबसाइट को बनाने में मैंने इनकी किसी तरह की कोई मदद नहीं की, सिर्फ वेबसाइट की जरूरतों के बारे में चर्चा की तथा बाकी काम इन पर ही छोड दिया, क्या आप मानेंगे कि यह इनकी पहली वेबसाइट है?

            यह दो पेज देखना मत भूलिए-

            फोटो गैलरी


            Event


            उम्मीद है आपको यह वेबसाइट पसंद आयेगी, अब आप सभी से सिर्फ एक गुजारिश है, यदि आप भी किसी वेबसाइट को बनाने के बारे में सोच रहे हैं तो एक बार मुझसे राय भी ले लें तथा स्व-रोजगार बढ़ाने में मेरी मदद करें|

            यदि आप ठीक ऐसी ही या कुछ कुछ इसके जैसी वेबसाइट अपने लिए बनवाना चाहें तो यह मात्र 5000/- रु. प्रति बर्ष की कीमत पर उपलब्ध है|

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