13 फ़रवरी 2011

ऑडियो पोस्ट: टूलबार तथा ब्लॉगर

यह एक ऑडियो पोस्ट है, नीचे दिए गए प्लेयर को प्ले कीजिये इसमें मैंने एक महत्वपूर्ण बिषय जो कि तकनीकी जानकारी ना/कम रखने वाले ब्लोगरों के लिए है, पर अपने विचारों को व्यक्त किया है- उम्मीद है कि ब्लोगरों को इससे लाभ होगा, यदि आपका कोई सवाल है तो आप यहाँ लिख सकते हैं, मैं कोशिश करूँगा आपकी समस्याओं का समाधान करने का|



इस ऑडियो को यहाँ से डाउनलोड करें

इस ऑडियो से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण लिंक:

सुशील जी का प्रश्न ऑर उसका उत्तर यहाँ देखें, मेरे ब्लागस्पाट.कॉम ब्लॉग नहीं खुल रहे हैं

अपने ब्लोगिंग से सम्बंधित सवाल यहाँ पूछें: अपना ब्लॉग़-ब्लोगिंग फोरम

सुशील जी का ब्लोगर प्रोफाइल

12 फ़रवरी 2011

ऑडियो पोस्ट: प्रोग्रामिंग कैसे सीखें?

यह एक ऑडियो पोस्ट है, नीचे दिए गए प्लेयर को प्ले कीजिये इसमें मैंने प्रोग्रामिंग कैसे सीखें बिषय पर अपने विचारों को व्यक्त किया है- उम्मीद है कि विद्यार्थियों को इससे लाभ होगा, यदि आपका कोई सवाल है तो आप यहाँ लिख सकते हैं, मैं कोशिश करूँगा आपकी समस्याओं का समाधान करने का|


07 फ़रवरी 2011

ब्लोगरों के लिए एक महत्वपूर्ण बात

"अपना ब्लॉग" पर कार्य करते वक्त मुझे ब्लोगरों के द्वारा की जाने वाली कुछ मुख्य गलतियों का पता चला है जिससे मैं आप सभी को आगाह करना चाहता हूँ, जिससे आप सभी अपने ब्लॉग में सुधार कर सकें|

आज समय की कमी के वजह से [कल मेरा पेपर है :( ] तो सिर्फ एक ही गलती के बारे में बताऊँगा जो सबसे महत्वपूर्ण है

क्या आप जानते हैं? आपके ब्लॉग पर मुख्यतः २ फीड होती हैं, पहली फीड आपकी पोस्ट की होती है तथा दूसरी फीड आपके ब्लॉग पर आने वाले कमेन्ट की होती है|

ब्लॉग फीड सामान्यता इस अड्रेस पर पाई जाती है : http://[आपका ब्लॉग एड्रेस]/feeds/posts/default
कमेन्ट की फीड सामान्यता इस एड्रेस पर पाई जाती है : http://[आपका ब्लॉग एड्रेस]/feeds/comments/default

उदहारण के तौर पर इस ब्लॉग की फीड के पते हैं-
http://yogendra-soft.blogspot.com/feeds/posts/default
http://yogendra-soft.blogspot.com/feeds/comments/default

पहली गलती कुछ ब्लोगरों ने की हैं अपने ब्लॉग की फीड को री-डाइरेक्ट करने की, याद रखिये कि आपके ब्लॉग की फीड री-डाइरेक्ट करने का अर्थ है अपने ब्लॉग को एग्रीगेट होने से रोकना यह आपके ब्लॉग के लिए बहुत ही बुरा है, इससे आपके ब्लॉग की ना सिर्फ पॉपुलरिटी रुकेगी बल्कि दूसरी साईट को यह पता भी नहीं चलेगा कि आपने नया लेख लिखा है|

इस गलती को कैसे सुधारें (इस पर एक सचित्र गाइड जल्द ही "अपना ब्लॉग" पर तैयार करूँगा पर फिलहाल सिर्फ शब्दों में समझें):

अपने ब्लॉग की सेटिंग पेज पर जाएँ, तथा साईट फीड विकल्प का चुनाव करें, इसमें आपको दूसरा टेक्स्ट बॉक्स अपने ब्लॉग की फीड को री-डायरेक्ट करने की सुविधा प्रदान करता है, देखिये कि इसमें कुछ भी लिखा नहीं होना चाहिए, सामान्यता यह बॉक्स खाली होना चाहिए| यदि आपने फीड-बर्नर का प्रयोग किया है तो यहाँ पर फीड बर्नर से आपकी फीड के लिए मिला एड्रेस भरा जाएगा |

सबसे पहले अपने ब्लॉग की फीड को जांचे, उसके लिए अपने ब्लॉग की फीड का पता  ब्राउसर के एड्रेस बार में टाइप कर दें,

आपके ब्लॉग की फीड 
इंटरनेट एक्सप्लोरर पर : आपके ब्लॉग के पोस्ट को दिखायेगी
मोजिला फायर फोक्स पर : आपके ब्लॉग को सब्सक्राइब करने की कोशिश करेगी
ओपेरा पर : आपके ब्लॉग के पोस्ट को बहुत खूबसूरत तरीके से दिखायेगी
क्रोम पर: आपके ब्लॉग के पोस्ट को xml फॉर्मेट में दिखायेगी
यदि आपने फीडबर्नर की सदस्यता ले रखी है तो: सभी ब्राउसर पर फीडबर्नर का पेज आपके ब्लॉग पर लिखे लेखों के साथ दिखाई देगा

यदि ब्राउसर आपके ब्लॉग की फीड को ऊपर बताए गए तरीके से दिखता है तो सब कुछ ठीक है और कुछ भी करने की जरूरत नहीं है|

पर यदि कुछ और लिखा आता है (कल किसी ब्लोगर की फीड को ब्राउसर पर पेस्ट करने पर यह लिखा आ रहा था invalid content type www.google.com जांचने पर पता चला कि उन्होंने अपने ब्लॉग की फीड को www.google.com पर री-डायरेक्ट कर रखा था) तो आपके ब्लॉग की फीड में सुधार की आवश्यकता है, तरीका बहुत ही आसान है, री-डायरेक्ट के बॉक्स को खाली रखना है उसमे कुछ लिखना नहीं है|


आप सभी को ज्ञात है कि "अपना ब्लॉग" एग्रीगेटर बन कर तैयार हो गया है और आप सभी अपना ब्लॉग इसमें शामिल कर सकते हैं, पर याद रहे कि अपना ब्लॉग जोड़ने से पहले आपको अपना अकाउंट बनाना होगा (अपना अकाउंट पर खता बनाने का तरीका आपको इस गाइड में मिल जायेगा) एक और खुशखबरी देना चाहूँगा कि "अपना ब्लॉग" को अभी मात्र 15 दिन ही हुए हैं और अलेक्सा में इसकी भारतीय रैंक १ लाख के निकट पहुँच चुकी है जो इस बात को दर्शाता है कि आप सभी लोगों ने इसको कितना पसंद किया है|


उम्मीद है कि आपको इस लेख से कुछ फायदा पहुंचा होगा, आपको ब्लॉग से सम्बंधित कोई भी मदद चाहिए तो जरूर बताएं, और साथ में यह भी बताएं कि आप "अपना ब्लॉग" पर फोरम चाहते हैं या नहीं, यूं तो सभी ब्लोगर ने हाँ में जबाब दिया है पर ब्लोगप्रहरी का फोरम खाली पड़ा रहने की वजह से मुझे फोरम बनाने के बारे में सोचना पड़ रहा है, फोरम के लिए अपने विचार रखें धन्यवाद|

18 नवंबर 2010

गंभीर समस्या: कृपया अपना मत रखें

मैंने chitthagat.in पर देखा कि 
  1. खेल वर्ग पर आने वाले लेख 500 से भी ज्यादा बार पढ़े जा रहे है |
  2. तकनीकी, घरबार तथा सेहत के लेखों पर औसतन 80-90 क्लिक होते हैं, जो धुरंधर लिक्खड़ हैं उनके लेखों पर 100 से ज्यादा क्लिक होना मामूली बात है, कमेन्ट के बारे मे तो ना ही कहा जाये तो बेहतर है कमेन्ट मे तो इस हाथ ले उस दे दे बाली बात है |
  3. इलाकाई, मस्ती के हालात तो थोड़े बहुत ठीक हैं |
  4. पर बाकी वर्गों मे जैसे कि कला, समाज, समाचार, धंधा, विज्ञान, सन्दर्भ, खरीदारी के हालात बदतर है | इन लेखों को पढ़ा नहीं जा रहा है, ना कोई कमेन्ट ना क्लिक ना किसी तरह का प्रोत्साहन |
इस तरह तो हम हिन्दी ब्लोगिंग मे पीछे ही रह जायेंगे, यदि आपके पास इस समस्या का कोई हल हो तो सुझाएँ, जिससे कुछ किया जा सके

15 अक्टूबर 2010

Audio post: X Factor - क्या मुझ में है ?


यह एक ऑडियो पोस्ट है, science blogger's par अल्पना जी की पोस्ट को देखा तो सोचा प्रयत्न कर के देखा जाये|

आवाज़ उनकी तरह मधुर तो नहीं है, फिर भी कोशिश की है, आप ही बताइए कि आपको कैसा लगा, जिससे अपने बाकी सभी ब्लॉग के साथ ऑडियो भी जोड़ सकूं |

29 जून 2010

20 मार्च 2010

WizBang - बनायें खुद को तार्किक स्तर पर बेहतर

Wizbang_logo
कई students, programming language के syntax और semantics को तो सीख लेते हैं पर किसी programming problem को solve नही कर पाते, यह समस्या इसलिए आती हैं क्यूंकी उन्होने सिर्फ़ programming language को सीखने पर ध्यान दिया है खुद को logical स्तर पर मजबूत नही बनाया| अधिकतर छात्र यह भूल जाते हैं की programming language में logic को syntax का प्रयोग करते हुए लिखा जाता है जब तक आपके पास किसी problem को solve करने का logic नही होगा आप प्रोग्राम नही लिख सकते|
logical ability (तार्किक क्षमता) बढ़ाने के लिए ही किसी भी प्रोग्रामिंग कोर्स को प्रारंभ करने से पहले flow chart सिखाए जाते हैं, उसके बाद psuedo code और सबसे आख़िर में syntax और semantics. ऐसा देखा गया है की flow chart बनाते समय students उनको अच्छी तरह से visualize नही कर पाते और ऐसा flow chart बनाते हैं जो problem को ठीक से solve नही करता या फिर ग़लत solve करता है|
students ठीक से visualize कर सकें इसके लिए कोई ऐसा software होना चाहिए जो logic को visually रन कर सके, ऐसे ही किसी softwareकी तलाश में मैने sourceforge.net को खंगाला तो एक बेहतरीन सॉफ्टवेर मेरी निगाह मे आ गया जिसका नाम है WizBang.

क्या है WizBang?

WizBang एक visual programming environment प्रदान करता है जिससे procedural programming language (सी व अन्य) को सिखाना तथा सीखना दोनों ही आसान हो जाता है, इसमें हमें program को लिखना नहीं पड़ता बल्कि हम visual elements का प्रयोग करके program को बनाते हैं| हर element को "wizzy" कहा जाता है जो program के logic और flow को प्रदर्शित करता है, हर "wizzy" procedural programming language के एक control structure का अनुरूप होता है जैसे conditional block, loop, assignment operation या फिर function call. programmer program को visually बनाता है जिसको WizBang में ही रन किया जा सकता है, पर इससे भी अच्छा है program के flow को visually दिखाना जिससे program कैसे काम कर रहा है यह समझने में आसानी रहे, इसके अलावा आप program को अन्य procedural language (सी, सी++, जावा, python इत्यादि) के source code में भी बदल सकतें हैं|

WizBang का इतिहास

Lowa State University के एक project based software course के लिए WizBang को प्रारंभ किया गया, यह कोर्स Dr. Simanta Mitra के द्वारा पढ़ाया जा रहा था. मुख्य रूप से तीन छात्रो को इस प्रॉजेक्ट के लिए चुना गया (Alex Kharbush, Bao Nguyen, and Chad Bibler). इस प्रॉजेक्ट पर बहस के दौरान Alex ने एक Laguage Parser बनाने का सुझाव रखा जो किसी Source Code को Visually Represent कर सके, पर अंत में यह निर्णय लिया गया कि ऐसा program बनाना आसान नही है और यह दिए गये समय में नही हो पाएगा. तब उन्होने इसके विपरीत दिशा में सोचना प्रारंभ किया और एक ऐसा प्रोग्राम बनाने का निर्णय लिया जो visual representation को Source Code मे बदलने की क्षमता रखता हो और नतीज़ा आया "WizBang".

Development Details

Language: C++
Graphical User Interface: Nokia's Qt Toolkit
Developer: Chad Bibler

कैसे कार्य करें?


  1. जितने भी variable का प्रयोग आप करना चाहते हैं उनको बना Data Explorer तथा Property Inspector की सहायता से बना लें, (दोनों चित्र 1 में दिखाए गए हैं)
    property inspector & Data Explorer
  2. Wizzy की सहायता से एक फ्लोचार्ट बना लें, (चित्र 2)
    wizzy of wizbang
  3. लॉजिक के अनुसार आपस में Arrow की सहायता से जोड़ दें (चित्र 3)
    Flow Chart using wizbang
  4. Debug तथा Run करने के लिए, चित्र 4, में दिए गये Tools का प्रयोग करें
    debug & Run
  5. परिणाम (Result) आप नीचे दिए गये चित्र में देख सकते हैं
    wizbang
  6. उपयोग:


    • यदि आप अभिभावक हैं तो अपने बच्चों के तर्किक शक्ति के विकास में आप इस का उपयोग कर सकतें हैं
    • यदि आप विद्यार्थी हैं तो प्रोग्राम्मिंग को अच्छी तरह सीखने के लिए आप इसका प्रयोग कर सकतें हैं
    • हाइ स्कूल तथा इंटर मीडीएट के विद्यार्थी कलन (फ्लो चार्ट) सीखने के लिए इसका प्रयोग कर सकते हैं
    • B.TECH. / M.TECH. के विद्यार्थी WizBang के source code का प्रयोग कर के इसको और extend कर सकते हैं और इसको अपने final year के project की तरह प्रयोग कर सकते हैं

05 मार्च 2010

गूगल गो

जैसा की हम सभी जानते हैं की गूगल हमेशा कुछ न कुछ नया लाता ही रहता है, इस बार गूगल लाया है एक नयी प्रोग्रामिंग भाषा "गूगल गो". बहुत कम लोग इस बात को जानते होंगे की यह नयी प्रोग्रामिंग भाषा उस २०% समय में बनी है जो गूगल अपने सभी employee को कुछ नया करने के लिए देता है.
क्या है "GO"?
GO गूगल के द्वारा बनाई गयी एक open source programming language है. गूगल के अनुसार यह आसान, तेज, सुरक्षित, मजेदार और concurrent programming language है. यदि कोई सी और सी++ पर कम करना जानता है तो GO पर भी कर सकता है, क्यूंकि यह वही syntax को प्रयोग करता है. इसमें garbage collection को भी शामिल किया गया है.
एक और प्रोग्रामिंग भाषा?
गूगल का मानना है की जिन भाषाओ (C, C++, JAVA etc.) का प्रयोग किया जाता है वो आज कल की application को बनाने के लिए उपयुक्त नहीं हैं, गूगल के अनुसार जिस तेजी से कंप्यूटर का विकास हुआ है उस तेजी से software development नहीं हो पा रहा है, software development के process में तेजी लाने के लिए programming languages में बदलाव जरूरी है, उदाहरण के लिए कुछ प्रोग्रामिंग भाषाएँ सी, सी++ hearder फाइल का प्रयोग करते हैं जिससे dependency analysis बढ़ जाती है और compilation धीरे होती है. यदि बात concurrency की हो तो उसके लिए प्रयोग होने वाला syntax बहुत कठिन होता है.
प्रोग्रामिंग भाषाओ में नए function डालने के लिए libraries का प्रयोग किया जाता है जबकि language खुद उन में से किसी भी function को अपने में शामिल नहीं करती, उसके लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है.
तो गूगल के अनुसार समय बदला है और computing के तरीके भी, ऐसे समय में एक ऐसी भाषा जो compilation में आसान हो, जिसमे program लिखना आसान हो, और run भी तेजी से होती हो तो user और developer दोनों को फ़ायदा होना निश्चित है.
महत्त्वपूर्ण बदलाव
  • pointer arithmetic को ख़त्म किया गया है
  • Type hierarchy, अब और नहीं
  • overloading methods और operator overloading ख़त्म
  • implicit type conversion रुका
  • header files की जगह package का प्रयोग
  • मुख्य type Strings, arrays और map रखे गए हैं
  • Threading और concurrent programming को programming language में ही स्थान दिया गया है
  • हर variable को declaration के समय ही initialize कर दिया जाता है
  • garbage collection भी programming language का ही एक feature है
  • multiple parallel assignmets, ( i, j = j , i) सही है
  • function कई value return कर सकते हैं
इसके अलावा भी कई बदलाव है जिनको समय-समय पर लिखता रहूँगा, अभी इतना ही

08 जनवरी 2010

मुझे बहुत जल्दी है...

कुछ समय पहले मेरे पास एक ई-मेल आया जिसमे एक छात्र ने मुझसे पूछा की वो सी प्रोग्रामिंग लॅंग्वेज को कितने दिनों मे सीख सकता है? वो जल्दी से जल्दी सीखना चाहता है क्यूंकी उसके पेपर सिर पर आ चुके हैं|

इस सवाल का जबाब देना आसान नही है, (बिना दिल दुखाए) फिर भी मैं इस लेख मे इस सवाल का जबाब दे रहा हूँ, उम्मीद है अधिकतर छात्रों को समझ मे आएगा|

पहली बात: आप को जल्दी क्यूँ है? पेपर सिर पर आ गये हैं, इसलिए? या फेल होने का डर है, इसलिए?

तो पहले मुझे एक बात बताइए कि आप पढ़ क्यूँ रहे हैं? पेपर मे पास होने के लिए या फिर अपना करियर बनाने के लिए? अगर सिर्फ़ पेपर मे पास ही होना है तो फिर इतनी चिंता करने की ज़रूरत नही है, उसके लिए मे आपको सबसे अच्छा तरीका बताता हूँ, कुछ मत कीजिए, कुछ भी नही, सेमेस्टर स्टार्ट होने से लेकर पेपर स्टार्ट होने के ३० दिन पहले तक कुछ भी मत कीजिए (पढ़ाई मे), खूब खेलिए, फिल्म देखिए, मस्ती कीजिए, और पेपर स्टार्ट होने मे जब ३० दिन रह जाए तो पिछले १० सालों मे आए हुए सभी सब्जेक्ट्स के सभी पेपर निकाल लीजिए और हर प्रश्न को उत्तर सहित घोल कर पी जाइए, घोल कर पीने का मतलब तो समझते ही होंगे? रट लीजिए जैसे तोता रट्ता है कुछ भी समझने की ज़रूरत नही है, आख़िर पास ही तो होना है, कितने नंबर चाहिए सिर्फ़ ३०, १०० में से और १५, ५० में से, है ना? यह तरकीब काफ़ी बढ़िया है, कभी कभी आप ५० से ज़्यादा नंबर भी ला सकते हैं| और आप देखेंगे की जो लोग रोज क्लास मे आते हैं उनसे भी ज़्यादा नंबर आप ला रहे हैं| याद रखिए की सिर्फ़ एक्सटर्नल मे, इंटर्नल मे यह तरकीब काम नही करती| इंटर्नल के लिए मे फिर कभी विस्तार से बताऊँगा, अभी इसी से काम चलाइए और इस ब्लॉग को सबस्क्राइब कर लीजिए जिससे आगे जो भी टिप मे दूं वो आप कहीं खो ना दें|

अब बात करता हूँ, सीखने की, किसके लिए? पेपर के लिए? नहीं पेपर के लिए भी और करियर के लिए भी, यह एक तपस्या है जो आपको ऐसा फल देगी जिससे आपको मज़ा आ जाएगा और अगर आप पूरी तरह से इस पर अमल कर पाए तो आप कॉलेज लाइफ भी एंजाय करेंगे, और करियर भी अच्छा बनेगा|

तो हम स्टार्ट करते हैं एक मिशन, क्या मिशन है? आपको सीखना है, करियर के लिए और अच्छे नंबर भी लाने हैं किसके लिए? सिर्फ़ करियर के लिए नहीं कॉन्फिडेन्स बढ़ाने के लिए भी, कॉन्फिडेन्स बढ़ने से क्या होगा? कॉन्फिडेन्स बढ़ने से आप लकी हो जाएँगे जी हाँ, कॉन्फिडेन्स बढ़ने से लकी होते हैं, भगवान को सुपारी देने से नही, की आज सुपारी दे दी कि प्रभु पेपर अच्छा करा देना तो ५० रुपये का प्रसाद चढ़ाऊँगा, ये सुपारी है, इससे आप लकी नही होंगे, लकी होते हैं कॉन्फिडेन्स से, जितना ज़्यादा अच्छा आपका कॉन्फिडेन्स होगा उतना ही अच्छा काम आप कर पाएँगे, बिना डरे, और जिस काम को बिना डरे किया जाए उसमे सफलता के मौके कई गुना बढ़ जाते हैं.

अब आते हैं मुद्दे की बात पर, क्या मुद्दा है? पढ़ा कैसे जाए जिससे कॉलेज की लाइफ भी मज़े से गुज़री जा सके और करियर मे भी चार चाँद लग जायें. पहले तो डिसाइड कीजिए की क्या पढ़ना है? जो सब्जेक्ट आप को पढ़ना है उस सब्जेक्ट का सिलबस देखिए, टाइम देखिए की कितना समय है आपके पास उस सब्जेक्ट को समझने के लिए, याद रखिए आपको समझना है पढ़ना नही है. समझने का मतलब है गहराई मे जानकारी होना, ज़्यादा जानकारी होना नहीं. ज़्यादा जानकारी तो किताबों मे है ही उसको दिमाग़ मे रखने से क्या होने बाला है? आपको उस जानकारी को इस्तेमाल करना आना चाहिए, तो आपको किसी भी सब्जेक्ट की जानकारी गहराई मे होनी चाहिए, गहराई मे कैसे होगी? उसका उदाहरण अपने जीवन मे लेकर, मतलब आपने कुछ पढ़ा उसको तुरंत ही प्रोसेस कीजिए की जो भी आपने पढ़ा है उसको कहाँ पर इस्तेमाल कर सकते हैं, जाहिर सी बात है की उस समय आपको पता ही नही लगेगा की उसको कहाँ पर इस्तेमाल कर सकते हैं, इस काम के लिए ही टीचर नामक प्राणी का जन्म हुआ है, अपने टीचर से पूछिए की कहाँ पर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है? एक बार आपके दिमाग़ ने पता लगा लिया की जो आपने पढ़ा है उसका संबंध वास्तविक जीवन से कहाँ है तो वो उसको भूलने बाला नही है, आप भूल भी गये तो दिमाग़ ज़रूरत आने पर अपना काम कर देगा, आपको याद दिलाने का. तो आपने एक बात अभी तक समझी कि जो पढ़ा उसको तुरंत ही कहीं ना कहीं पर लिंक कर दो रियल लाइफ से, हो गया काम ,हो गया याद. अब दुबारा फिर से पढ़ना नही पड़ेगा. क्यूंकी अब आप समझ चुके हैं, आपके दिमाग़ ने उसको स्वीकार कर लिया है, उसको याद रखने के लिए बिशेष मेहनत करने की ज़रूरत नही है. जो चीज़ हमारा दिमाग़ स्वीकार कर लेता है उसको भूलता नही है जैसे आपके दिमाग़ ने ये स्वीकार कर लिया है की अ-आ-ई-ई भी कुछ होता है जिसके बिना आपका काम नही चलता तो आज तक आप उसको भूले नहीं हैं, और अगर उनका ऑर्डर भूल भी गये हैं तो भी उनका इस्तेमाल नही भूले.

दूसरी बात जो आपको समझनी चाहिए वो यह है की टीचर का काम सिर्फ़ किताब मे लिखे हुए को पढ़ना नही होता, उसका काम उस लिखे हुए के सार को स्टूडेंट को समझाना होता है. ये जो समझने-समझाने का संबंध होता है ये ठीक वैसा ही है जैसा ताली बजाने का, जब दो हाथ मिलेंगे तभी ताली बजेगी, ठीक वैसे ही जब स्टूडेंट अपना दिमाग़ खुला रखेगा तभी वह टीचर की बात को समझ सकता है और तभी संबंधित प्रश्न पूछ सकता है, और किसी बात को समझ सकता है. यदि पढ़ते समय आप ३-ईडियट्स मे खो गये, या किसी को गुलाब देने लग गये तो आप टीचर को यह दिखाने के लिए की आप भी क्लास मे ही है, उल्टे सीधे सबाल पूछेंगे और टीचर को और बाकी लोगो को परेशान करेंगे. यदि आप टीचर से तर्क-वितर्क कर लेते है, क्लास मे होते हुए ही तो जब क्लास ख़त्म होगी तब तक आप कम से एक टॉपिक को अच्छी तरह से समझ चुके हैं और अब आपको उसको समझने के लिए ना तो लिखना है, ना ही दुबारा पढ़ना है सिर्फ़ एक बार दोहरा भर लेना है और आपका कीमती समय बचेगा जिसे आप अब किसी को गुलाब देने मे या फिर ३-ईडियट्स मे लगा सकते है बिना पढ़ाई मे नुकसान के.

तो कुल मिला कर आपने अभी तक दो बातें सीखीं, पहली उदाहरण के साथ समझिए और दूसरी क्लास मे पूरे ध्यान के साथ सीखिए.

अब आते हैं, आख़िरी बात पर आपने आज पूरे दिन मे जो कुछ भी सीखा है शाम को सोते समय उस को एक बार दिमाग़ मे दोहरा लीजिए, याद रखिए की दोहराते समय कुछ भी रहना नही चाहिए आपने क्या सीखा? क्यूँ सीखा, जो सीखा गया उससे जुड़े हुए किस उदाहरण के बारे मे आज आपने सीखा टीचर से क्या पूछा, उन्होने क्या पढ़ाया, कैसे पढ़ाया, दूसरे स्टूडेंट ने क्या सबाल पूछा था वग़ैरह-वग़ैरह| पूरी दिन की रील आपके दिमाग़ मे ठीक वैसे घूमनी चाहिए जैसे आपके सामने सब कुछ दुबारा हो रहा है.

हो गया मिशन कंप्लीट, इसमे अभी कुछ कुछ बातें और है जो जोड़ी जाएँगी और उनके बारे में मैं धीरे धीरे इस ब्लॉग में बताता रहूँगा. आप सिर्फ़ यहाँ पर सबस्क्राइब कीजिए जिससे आप कुछ भी मिस ना करें.

योगेंद्र पाल
yogendra.pal3@gmail.com
www.learnbywatch.com

25 नवंबर 2009

भारत को भी चाहिए एक SEASAME STREET

कुछ समय पहले SEASAME STREET ने अपने 40 साल पूरे किये| बहुत हंगामा हुआ, google ने अपने होम पेज के icon को SEASAME STREET के characters से सजाया और SEASAME STREET के पुराने विद्यार्थियों ने अपना बचपन याद किया| आप लोग कहेंगे कि यह SEASAME STREET आखिर है क्या जिसका में गुणगान कर रहा हूँ और भारत को भला इसकी आवश्यकता क्यों?
SEASAME STREET आखिर है क्या?
SEASAME STREET एक अमेरिकां organization  है जो शिक्षा के क्षेत्र में बहुत कार्य कर रही है शिक्षा को बच्चों के लिए रोचक और मनोरंजक बना रही है| एक उदाहरण आप नीचे देख सकते हैं जिसमे बच्चों को A, B, C, D सिखाने का प्रयत्न किया गया है:-

उम्मीद है आपको मजा आया होगा| ये पढ़ाने का एक मनोरंजक तरीका है जिसको भुनाया है SEASAME STREET ने| कठपुतलियां, कार्टून, मजेदार आवाजें, अजीब से दिखने वाले प्राणी किसके कौतूहल का बिषय नहीं होते, बच्चों को भी वो अच्छे लगते हैं और इस बच्चों के इसी मनोविज्ञान को समझते हुए SEASAME STREET उनके लिए एक उम्दा किस्म की शैक्षणिक सामग्री तैयार करती है|
भारत में आवश्यकता
भारत में भी इस तरह की शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता है यह सिर्फ एक अच्छा तरीका ही नहीं बल्कि भारत की जरूरत भी है| यह बात आप सभी मानते होंगे कि भारत की अधिकतर आबादी आज भी गाँव में रहती है| शिक्षा के जितने भी प्रयत्न हमारी सरकार ने किये हैं वो सभी आबादी के सामने बौने है| कभी कोई प्रभावी तरीका सामने आया भी तो वो भ्रस्ताचार की भेंट चढ़ गया| इसलिए सरकार ने गैर सरकारी संगठनों को मौका दिया आगे आने का और साक्षरता को बढ़ाबा देने का पर वहां भी वाही हश्र हुआ जो आज तक बाकि योजनाओं का होता आया है|
SEASAME STREET कैसे ला सकती है बदलाब 
SEASAME STREET  का तरीका अचूक है यह हर जगह काम करेगा| बच्चों की पढाई के प्रति रूचि को ख़त्म नहीं होने देगा क्योंकि यहाँ पर बच्चों को लगेगा ही नहीं कि उनको पढाया जा रहा है| यह उनके लिए मनोरंजन का जरिया होगा और हमारे लिए उनको पढ़ाने का एक बेहतर तरीका| गाँव में जहाँ पर स्कूल नहीं है या फिर अच्छे अध्यापकों का मिलना मुस्किल होता है वहां पर जरूरत होगी सिर्फ एक जगह की, एक छोटा सा कमरा जहाँ पर एक टी.वी. और एक डीवीडी प्लेएर की जरूरत होगी, एक बड़ा आदमी चाहिए जो इन सभी उपकरणों को संभल सके और बस तैयार हो गया एक स्कूल जहाँ पर बच्चों को पढ़ाने के लिए मानना नहीं पड़ेगा, माता पिता की जेब पर ज्यादा वजन नहीं पड़ेगा और एक और फ़ायदा भी होगा वह है भारत की सदियों से चली आ रही कला जो अब लुप्त होने लगी है बच जाएगी, भारत में कठपुतलियां कोई नयी चीज़ नहीं है बल्कि यह वो कला है जो भारत के साथ सदियों से जुडी है, परन्तु अब MTV के ज़माने में लुप्त होने लगी है| इसको एक नया जीवन मिलेगा भारत की SEASAME STREET से और कई लोगों को रोजगार|
मैं इस समय LEARN BY WATCH नाम की एक संस्था से जुडा हुआ हूँ जिसका उद्देश्य कुछ ऐसा ही है, इस समय उसका प्रयाश इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों को सही शैक्षिणिक सामग्री उपलब्ध करवाना है तथा उस से जो पैसा मिलता है उसके एक भाग को गाँव के बच्चों के लिए सुरक्षित कर के रखा जाता है, सही मौका मिलते ही उस पैसे को प्रयोग में लाया जायेगा और जैसा कि इस लेख में मैंने बताया है वैसे स्कूल का निर्माण करवाया जायेगा| हमारा प्रयाश हर बच्चे को १०-५० रूपये प्रति माह पर एक अच्छी शिक्षा प्रदान करने का है, जिसमे आपका सहयोग भी चाहिए|

इनको भी देखें-

कृपया अपने विचारों को जरूर लिखें-
योगेन्द्र पाल
प्रोजेक्ट इंजिनियर
CDAC-मुंबई

24 नवंबर 2009

शिक्षा जरूरी नहीं ???

मेरा नाम योगेन्द्र पाल है, मैं आगरा का रहने वाला हूँ| मेरा गाँव "खुरतनिया" मैनपुरी-किसनी रोड पर पड़ता है| मेरे पापा जी जल निगम में इंजिनियर हैं और उन्होंने इंजीनियरिंग १९८१-८२ में की थी| मेरे बाबा जी गाँव के रहने वाले ही थे और कभी भी शहर नहीं गए थे, इस के बाबजूद भी उन्होंने पापा जी को अच्छी शिक्षा दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जिसका नतीजा यह है कि आज हमारे घर में २ इंजिनियर है (मैं और पापा जी ) और ३ इंजिनियर आने वाले हैं (मेरा भाई और दोनों बहने इंजीनियरिंग कर रहीं हैं)| पापा जी बताते हैं कि उस समय गाँव वाले पढाई को बहुत महत्व देते थे और सभी ने अपने अपने बच्चों को पढ़ने की पूरी कोशिश की थी. अध्यापक भी पढ़ाने में काफी रूचि लेते थे और समय समय पर विद्यार्थियों के घर पर आते रहते थे|
कई साल बीत गए हैं और अब २०१० दस्तक दे रहा है| मैं अक्सर अपने गाँव जाता रहता हूँ और गाँव में कही भी शिक्षा को नहीं पता. अब तो मेरे गाँव में स्कूल भी है ५ वीं कक्षा तक, उसके बाद भी कोई अपने बच्चों को पढने नहीं भेजता, हाँ, पंजीरी और चावल लेने के लिए भेजना नहीं भूलते| किताबों में रुपये खर्च करना उनको रुपये की बर्बादी लगता है, मुझे लगता ही नहीं कि ये वही गाँव है जहाँ से मेरे पापा और उनके कई मित्र उस समय इंजिनियर बन कर निकले थे जब शायद वो इंजिनियर शब्द का मतलब भी नहीं जानते होंगे और स्कूल जाने के लिए जंगल को पार कर के ३ कोस (९ किलोमीटर) पैदल चल कर जाना पड़ता था|

इस बदलाब का कारन जानने का प्रयत्न कर रहा हूँ| जान पाया तो आगे लिखूंगा....
यदि आप समझते हैं तो आप भी लिखिए 


वैसे में शिक्षा के प्रति जागरूकता फ़ैलाने का प्रयत्न और शिक्षा के सरल तरीकों की खोज में लगा हूँ जिससे कि उन जगहों पर भी अच्छी शिक्षा प्रदान की जा सके जहाँ पर अच्छे अध्यापक नहीं है. मैं यह प्रयाश एक छोटी फर्म जिसका नाम Learn By Watch है, के साथ मिल कर रहा हूँ| मेरे प्रयाशों को आप देख सकते हैं इस लिंक पर
http://www.youtube.com/watch?v=T6dWsov9bLI

08 अक्टूबर 2009

सूचना प्रौधौगिकी में रोज़गार के अवसर

सूचना प्रौधौगिकी में रोज़गार के अवसर
Jobs in Information Technology

सूचना प्रौधौगिकी ने भारत में रोज़गार के अनेक अवसर पैदा किए हैं परन्तु छोटे शहरों तथा गांव में रहने वाले विधार्थी सही दिशा ना मिलने की वजह से इन अवसरों को हाथ से गंवा देते हैं! इस तरह की सभाएं या तो महानगरों में होती हैं या फिर कॉलिजों में जिसका फायदा यहाँ के विधार्थी नही उठा पाते! इसी बात को ध्यान में रखते हुए आपके शहर मैनपुरी में एक सभा आयोजित की जा रही है जिसमे आप को सूचना प्रौधौगिकी में संभावित रोज़गार के अवसरों के बारे में बताया जाएगा! सभा में निम्नलिखित विषयों पर चर्चा की जाएगी:-

क्या है सूचना प्रौधौगिकी ?
हार्डवेयर (Hardware) के क्षेत्र में रोज़गार
सॉफ्टवेयर (Software) के क्षेत्र में रोज़गार
ऐनिमेशन (Animation) के क्षेत्र में रोज़गार
गेम डेवलपमेंट (Game Development) के क्षेत्र में रोज़गार
वेब डिज़ाइनिंग (Web Designing) के क्षेत्र में रोज़गार
कैसे करें तैयारी?
पाँचवी कक्षा से अधिक के बच्चों को कैसे तैयार करें ?
क्या करें हाइस्कूल (High School) में क्या करें ?
इन्टरमीडीएट में क्या करें ?
यदि आपके पास विज्ञान बिषय नही है तो क्या करें ?
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यदि आप भी इस सभा में शामिल होना चाहते हैं तो मुझे ई-मेल करें yogendra.pal3@gmail.com पर! आप से अनुरोध है की अधिक से अधिक लोग इसका लाभ ले सकें इसलिए सभी तक यह जानकारी पहुँचाने का प्रयास करें!
सधन्यवाद!

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